Dreams...

ये सपनो की आहट में
छन छन का स्वर क्यूँ हैं
उन मधुर सी कल्पनाओं का
हम पर सुरूर क्यूँ हैं
अनजान सी पहेली बुनती हूँ
उन आकृतियों में खुद को ढूद्ती हूँ
शब्द नहीं होते यहाँ
बस कुछ लकीरों का साथ होता हैं
इस विचित्र सी दुनिया में
कही कोई हमराज़ भी होता हैं


Why don't we get it until we dream it?
Why is life so nice in dreams and so hard in real?
Why is life meaningless without a dream?
Why is life so happening and challenging with a dream?
Why human turn to animal for there single dream?
Why some dreams are shattered and some achive great heights?

Still I love dreaming...

Keep Faith
Chakoli :)

1 comment:

ALI said...

Wash ustaad Waah....

शब्द नहीं होते यहाँ
बस कुछ लकीरों का साथ होता हैं
इस विचित्र सी दुनिया में
कही कोई हमराज़ भी होता हैं

Kya baat hai...

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